के तुझ से जुदा होकर भी,
जीने की आदत होगई
तुम लौट के आओगे हमसे मिलने,रोज़ दिल को बहलाने की आदत होगई, तेरे वादे पे किया भरोसा हमने,
शब्-भर तेरा इंतज़ार करने की आदत होगई,ख़ुशी मैं भी हम क्या मुस्कराते के,
तेरी जुदाई मे रोने की आदत होगई, काफिले निकल गए हमें छोड़ के,
अब तो तनहा सफ़र की आदत होगई, हर मोड़ पर मिली गम की पर्छैयाँ,
ज़िन्दगी से समझोता करने की आदत होगई !!!!
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