Wednesday, March 23, 2011

" तुम नहीं आये........!!!!!!!!

शाम रोज़  जाती है मेरे दरवाजे पर,
मेरी तन्हाई का तमाशा देखने के लिए,
सूरज रोज़ निकल आता है,मुझे उम्मीद दिखाने को,
चाँद भी पन्दरा बीस दिनों तक झलक दिखाता है,आते जाते मौसम जैसे,
वैसे और खोफ भी आते हैं,अंधेरा भी बिसात भर डराता है,
ज़िन्दगी भी दूर खड़ी हंसती है,
कल बारिश ने भी डराया दिया कभी ना बरसने को,
खिजान के पते भी रुस्वायिओं से डरने लगे,
बर्फ तक ने अपनी सर्द बांहों मे पनाह देने को कहा,
सभी आये बारी बारी सिर्फ तुम नहीं आये !!!!

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