शाम रोज़ आ जाती है मेरे दरवाजे पर,
मेरी तन्हाई का तमाशा देखने के लिए ,
सूरज रोज़ निकल आता है,मुझे उम्मीद दिखाने को,
चाँद भी पन्दरा बीस दिनों तकझलक दिखाता है,आते जाते मौसम जैसे ,
वैसे और खोफ भी आते हैं,अंधेराभी बिसात भर डराता है,
ज़िन्दगी भी दूर खड़ी हंसती है,
सूरज रोज़ निकल आता है,मुझे उम्
चाँद भी पन्दरा बीस दिनों तक
वैसे और खोफ भी आते हैं,अंधेरा
ज़िन्दगी भी दूर खड़ी हंसती है,
कल बारिश ने भी डराया दिया कभी ना बरसने को,
खिजान के पते भी रुस्वायिओं सेडरने लगे,
खिजान के पते भी रुस्वायिओं से
बर्फ तक ने अपनी सर्द बांहों में पनाह देने को कहा,
सभी आये बारी बारी सिर्फ तुमनहीं आये !!!!
सभी आये बारी बारी सिर्फ तुम
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