“यादों” को भुलाने में कुछ देर तो लगती
“आँखों” को सुलाने में कुछ देर तो लगती
किसी शख्स को भुलाना इतना आसान तो
“दिल” को समझाने में कुछ देर तो लगती
“भरी महफ़िल” में जब कोई अचानक याद आजाये,
फिर आंसू छुपाने में कुछ देर तो लगती है,
जो शख्स जान से भी प्यारा हो “
“दिल” को यकीन दिलाने में कुछ देर तो
dats true i totaly undastnd ur feelins man............
ReplyDeletevery true...
ReplyDeleteThnx Rik & Thnx Vijayji :)
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