Monday, October 1, 2012

" पापा याद बहुत आते हो, कुछ ऐसा भी मुझे कहो ".


"मेरे पिताजी स्व.श्री.देवी दत्त जखमोला जी की याद में उनको समरपित".

"पापा याद बहुत आते हो, कुछ ऐसा भी मुझे कहो ".
 
माँ को गले लगाते हो, कुछ पल मेरे भी पास रहो !
’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो !
मैनेँ भी मन मे जज़्बातोँ के तूफान समेटे हैँ, 
ज़ाहिर नही किया, न सोचो पापा के दिल मेँ प्यार न हो! 

थी मेरी ये ज़िम्मेदारी घर मे कोई मायूस न हो, 
मैँ सारी तकलीफेँ झेलूँ और तुम सब महफूज़ रहो,
सारी खुशियाँ तुम्हेँ दे सकूँ, इस कोशिश मे लगा रहा,
मेरे बचपन मेँ थी जो कमियाँ, वो तुमको महसूस न हो!

हैँ समाज का नियम भी ऐसा पिता सदा गम्भीर रहे,
मन मे भाव छुपे हो लाखोँ, आँखो से न नीर बहे!
करे बात भी रुखी-सूखी, बोले बस बोल हिदायत के,
दिल मे प्यार है माँ जैसा ही, किंतु अलग तस्वीर रहे!

भुला नही मुझे हैँ अब तक याद, तुतलाती मीठी बोली, 
पल-पल बढते हर पल मे, जो यादोँ की मिश्री घोली,
कन्धोँ पे वो बैठ के जलता रावण देख के खुश होना,
होली और दीवाली पर तुम बच्चोँ की अल्हड टोली!

माँ से हाथ-खर्च मांगना, मुझको देख सहम जाना,
और जो डाँटू ज़रा कभी, तो भाव नयन मे थम जाना,
बढते कदम लडकपन को कुछ मेरे मन की आशंका,
पर विश्वास तुम्हारा देख मन का दूर वहम जाना! 

कॉलेज के अंतिम उत्सव मेँ मेरा शामिल न हो पाना,
ट्रेन हुई आँखो से ओझल, पर हाथ देर तक फहराना,
दूर गये तुम अब, तो इन यादोँ से दिल बहलाता हूँ,
तारीखेँ ही देखता हूँ बस, कब होगा अब घर आना!

अब के जब तुम घर आओगे, प्यार मेरा दिखलाऊंगा,
माँ की तरह ही ममतामयी हूँ, तुमको ये बतलाऊंगा,
आकर फिर तुम चले गये, बस बात वही दो-चार हुई,
पिता का पद कुछ ऐसा ही हैँ फिर खुद को समझाऊंगा!
" पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो ".

Thursday, December 15, 2011

" मंजिल भी तेरी थी और रास्ता भी तेरा था ".



मंजिल भी तेरी थी और रास्ता भी तेरा था,

एक तेरा प्यार पा लू बस यही सपना मेरा था,

एक हम अकेले रह गए और पूरा संसार तेरा था,

साथ साथ रहने की सोच भी तेरी थी,फिर अकेले छोड़ जाने का ख्याल भी तेरा था,

हाथो में हाथ लेकर मुझे हसाने की कसम भी तेरी थी,

फिर मेरी आँखों में आंसुओ का सिलसिला भी तेरा था,

हम क्यू यहाँ तनहा रह गए,मेरा दिल सवाल करता है,

किस्मत तेरी थी पर क्या खुदा भी तेरा था ?

खुदा बोला उसपे ऐतबार करने की गलती तेरी थी,

उसे दोस्त बनाने का ख्याल भी तेरा था,उसे चाहने की गलती भी तेरी थी,

उसे अपनाने का ख्याल भी तेरा था,उसे क्यू गम हो तेरे दूर जाने का ?

क्या उसने कभी कहा था वो सिर्फ तेरा था.................????????

Wednesday, August 3, 2011

" मैं नाम तलाश रहा हूँ "

कुछ बहुत गहरा
बहुत अलग
बहुत ख़ास
एहसास है वो
जो तुमसे जुड़ा है...ये वो फ़िक्र नहीं
जो एक दोस्त के लिए
महसूस होता है, ही ये वो प्यार है,
"
शादी" जिसका अंतिम पड़ाव
माना जाता है नहीं, इस परिधि में भी
नहीं समेट पाता मैं
इस रिश्ते को
तुम्हें पाने की कभी
ख्वाहिश नहीं हुई,शायद इसलिए...क्योंकि कभी लगा ही नहीं
तुम दूर हो,चाहा की तुम्हें भुला दूं
पर भूलूँ भी तो क्या !तुम्हें कभी
याद ही नहीं किया मैंने...
बहुत सोचा ये क्या रिश्ता है
तुम्हारा मुझसे...की जानना चाहता हूँ
"
तुम कैसे हो ?"दुआ करता हूँ
"
तुम खुश रहो ?"अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाने की तम्मना नहीं तुम्हें...अपना ही हिस्सा बना बैठा हूँ !
आस-पास की कई नज़रें
सवाल करती हैं मुझसे...क्या कहूँ ,क्या नाम दूँ,
मैं नाम तलाश रहा हूँ...ऐसा कुछ सूझता ही नहीं...जिससे बाँध सकूं तुम्हें
किसी अदने से रिश्ते में...

Wednesday, May 4, 2011

" दोस्ती "


क्या खबर तुम को दोस्ती क्या है, ये रौशनी भी है अँधेरा भी है,
ख्वाहिशों से भरा जजीरा भी है,बोहत अनमोल एक हीरा भी है
दोस्ती एक हसीन ख्वाब भी है,पास से देखो तो सरब भी है
दुःख मिलने पे यह अज़ब भी है,और यह प्यार का जवाब भी है
दोस्ती यूँ तो माया जाल भी है,एक हकीकत भी है ख्याल भी है
कभी फुरक़त कभी विशाल भी है,कभी ज़मीन कभी फलक भी है
दोस्ती झूट भी है सच भी है,दिल मैं रह जाये तो कसक भी है
कभी ये हार कभी जीत भी है,दोस्ती साज़ भी संगीत भी है
शेर भी नज़म भी गीत भी है,वफ़ा क्या है वफ़ा भी दोस्ती है
दिल से निकली दुआ भी दोस्ती है,बस इतना समझ लो तुम
प्यार की इन्तहा भी दोस्ती है ……!!!!!!

Wednesday, April 27, 2011

" बहाने धुंडते हैं "


किताबों में मेरे फ़साने धुंडते  हैं,
नादान हैं गुज़रे ज़माने धुंडते हैं,जब वो थे तलाश--जिंदगी भी थी,
अब तो मौत के ठिकाने ढूंढते हैं,कल खुद ही अपनी महफ़िल से निकला था,
आज हुए से दीवाने धुंडते हैं,मुसाफिर बेखबर हैं तेरी आँखों से,
तेरे शहर में मयखाने धुंडते हैं,तुझे क्या पता -सितम धाने वाले,
तेरे दिए ज़ख्मों में प्यार के नजराने धुंडते हैं,निकल आते हैं अश्क हँसते हँसते,
हम तो रोने के बहाने धुंडते हैं......!!!!!!!!!

Tuesday, April 26, 2011

" पहली मोहब्बत "

खुवाब झूठे किसी को दिखाया नही करते,

मेरे दोस्त ! यूँ किसी को सताया नही करते,

एक बार यूँ किसी को कह कर अपना,

दामन फिर उस से चुराया नही करते,

उस के इंतज़ार से भला क्या हो गा हासिल,

आने का कह कर भी जो आया नही करते,

रखते हों जो दर्द भरा दिल अपने सीने में,

दूसरों का दिल फिर वो दुखाया नही करते,

दो क़दम साथ चल कर जो जुद्दा हो जाये,

ऐसे लोगों को तो हमसफ़र बनाया नही करते,

किस तरह गुज़रती होगी जिंदगी उन की,

पहली मोहब्बत को जो दिल से भुलाया नही करते !!

Monday, April 11, 2011

" एक पत्थर "

एक पत्थर को यूँ खुदा करके,क्या मिला ऐसा तजुर्बा करके,

दर्द बढ़ता गया दावा करके,लम्हा लम्हा ज़रा ज़रा करके,

बन गयी बद्दुआ ख़ुशी वो ही,जिसको माँगा किये दुआ करके,

ज़ख्म खाए बड़े बड़े हमने,उस से छोटी सी इल्तेजा करके,

ज़िन्दगी आजमाए जी भरके,हम भी निकले है हौसला करके,

रास्ते में यकीन मिला लेकिन,वो भी जाता रहा दगा करके,

सिर्फ यादें  ही हमने पायी है,भूल जाने का फैसला करके,

उसकी राहों का रुख अगर करना,ज़ख्म खाने का हौसला करके,

याद रखना भलाई औरों की,भूल जाना मगर भला करके.