Thursday, March 31, 2011

" एक सैनिक की आवाज़ "


एक दिन हम आसमान को धरती पर ला देंगे,
मजबूत हैं कितने हमारे इरादे ये सबको दिखा देंगे,
इस देश की सरहद की तरफ बढ़ेगी जो बाजू,
उसे एक दिन जिस्म से उखाड़ देंगे,
इस देश की अमन चैन शांति को जो भी ललकारेगा,
एक ना एक दिन वो खुद ही हारेगा,
बुराई ना कभी आबाद हुई है ना ही कभी आबाद होगी,
एक दिन मेरे सपनो के भारत की शुरुआत तो होगी,
आतंक के साये तले अभी है हमारी ये खूबसूअरत कश्मीर की वादी,
कभी तो वहाँ फिर अमन चैन और खुशहाली होगी,
रूकने ना पाएंगे अब ये बद्ते हुए कदम,
जब तक है सांस चलती रहेगी आतंक के खिलाफ अपनी ये जंग,
सरहदों से अपनी कभी ऊस पार हम ना जाएंगे,
आएगा जो कभी इस ओर कोई तो उसका नामो निशान मिटा देंगे,
एक दीं आसमान को धरती पर ला देंगे,
मजबूत हैं कितने हमारे हौसले ये सबको दिखा देंगे,
घर घर में शिक्षा का दीप हम जगाएँगे,
हर किसी को शिक्षा मिले ये अपना इरादा है,
अमन चैन शांति कर देंगे हर तरफ एक दिन,
अपना सबसे ये वादा है,राह मुश्किल है मंज़िलें दूर् नही,
आतंक के आगे घुटने टेक दें इतने हम भी कमजोर नही,
हर किसी के चेहरे पर सुकून की मुस्कान ला देंगे,
चाँद सितारों से एक दिन इस धरती को सजा देंगे,
एक दिन आसमान को धरती पर ला देंगे,
मजबूत हैं कितने अपने इरादे ये सबको दिखा देंगे...........!!!!!!!!!!

Monday, March 28, 2011

" आदत होगई "

के तुझ से जुदा होकर भी,
जीने की आदत होगई
तुम लौट के आओगे हमसे मिलने,
रोज़ दिल को बहलाने की आदत होगईतेरे वादे पे किया भरोसा हमने,
शब्-भर तेरा इंतज़ार करने की आदत होगई,ख़ुशी मैं भी हम क्या मुस्कराते के,
तेरी जुदाई मे रोने की आदत होगईकाफिले निकल गए हमें छोड़ के,
अब तो तनहा सफ़र की आदत होगई, हर मोड़ पर मिली गम की पर्छैयाँ,
ज़िन्दगी से समझोता करने की आदत होगई !!!!

Wednesday, March 23, 2011

" तुम नहीं आये........!!!!!!!!

शाम रोज़  जाती है मेरे दरवाजे पर,
मेरी तन्हाई का तमाशा देखने के लिए,
सूरज रोज़ निकल आता है,मुझे उम्मीद दिखाने को,
चाँद भी पन्दरा बीस दिनों तक झलक दिखाता है,आते जाते मौसम जैसे,
वैसे और खोफ भी आते हैं,अंधेरा भी बिसात भर डराता है,
ज़िन्दगी भी दूर खड़ी हंसती है,
कल बारिश ने भी डराया दिया कभी ना बरसने को,
खिजान के पते भी रुस्वायिओं से डरने लगे,
बर्फ तक ने अपनी सर्द बांहों मे पनाह देने को कहा,
सभी आये बारी बारी सिर्फ तुम नहीं आये !!!!

Tuesday, March 22, 2011

" कुछ देर तो लगती है "


“यादों” को भुलाने में कुछ देर तो लगती है,


“आँखों” को सुलाने में कुछ देर तो लगती है,


किसी शख्स को भुलाना इतना आसान तो नही होता,


“दिल” को समझाने में कुछ देर तो लगती है,


“भरी महफ़िल” में जब कोई अचानक याद आजाये,


फिर आंसू छुपाने में कुछ देर तो लगती है,


जो शख्स जान से भी प्यारा हो “अचानक” दूर हो जाये,


“दिल” को यकीन दिलाने में कुछ देर तो लगती है.....!!!!!

Monday, March 21, 2011

! ख्वाहिशों की भीड़ में कहीं ज़िन्दगी खोती रही !

साँस जाने बोझ कैसे जीवन का ढोती रही,

नयन बिन अश्रु रहे पर ज़िन्दगी रोती रही,

एक नाज़ुक ख्वाब का अंजाम कुछ ऐसा हुआ,

मैं तड़पता रहा इधर वो उस तरफ़ रोती रही,

भूख,आंसू और गम ने उम्र तक पीछा किया,

मेहनत के रुख पर ज़र्दियाँ,तन पर फटी धोती रही,

उस महल के बिस्तरे पे सोते रहे कुत्ते,बिल्लियाँ,

धूप में पिछवाडे एक बच्ची छोटी सोती रही,

तंग आकर मुफलिसी मन खुदखुशी कर की मगर,

दो गज कफ़न को लाश उसकी बाट जोती रही,

'तरुण' की ख्वाहिशों का कद इतना बढ गया,

ख्वाहिशों की भीड़ में कहीं ज़िन्दगी खोती रही......!!!!!